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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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जिंदादिली

जिंदादिली

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हर बार जीत मिले यह लाजमी तो नहीं 
जीत के लिए ही खेलें हां उम्मीद हो यही 

सफ़र का मज़ा मंजिल से अधिक है 
मंजिल मिलने की खुशी का एहसास करवाता है यही 

जीत या हार यह इक सिक्के के दो पहलू हैं 
कुछ भी मिले चाहे स्वीकार दोनों हैं 

हारकर भी खड़े रहना ही असली जीत है 
अपराजेय की भावना रखना ही जिंदादिली है।


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