क्या याद है बचपन ?
क्या याद है बचपन ?
वो हुड़दंगी खेल खेल में, करना अल्हड़ शरारतें
रोज़ नए तरकीबों के संग करते नई करामातें
वो हँसना, वो रोना, वो मस्ती में एक दूजे को धकेलना
कहीं चोट जो लग जाए तो पछतावे के आँसू झेलना
जाने कितने मासूम अहसासों से भरा लड़कपन
याद है तुमको या भूल गए वो बचपन
हर दिन मिलना, बातें करना, छोटी बातों पर करना लड़ाई,
पूरा दिन बीत जाता, करते एक दूजे की खिंचाई,
पर एक पल भी शिकायत से भरा नहीं था मन
याद है तुमको या भूल गए वो बचपन
हर बात ज़ुबा पर होती थी
हर दिल का हाल बताते थे
वो मित्र मंडली बचपन की
राज़-ए- दिल समझ जाते थे
एक दूजे की खुशियों की चाबी, बिन पूछे जाते थे बन
याद है तुमको या भूल गए वो बचपन
जाने कब सयाने हो गए, मासूमियत के माने खो गए,
ज़िंदगी के सफर में नए दोस्त क्या मिले
बचपन के दोस्त आउटडेटेड ज़माने हो गए,
क्या करोगे भइया पाकर इतना दौलत, इतना धन
याद है तुमको या भूल गए वो बचपन
इक बार पुराने रास्ते से गुज़रो तो समझ आए
बाहें फैलाये बैठीं हैं ,जाने कब से वो राहें
अब भी पुकारते हैं ,वो दोस्त, वो गाँव ,वो अपनापन
फिर याद करो , मत भूलो, वो अपना बचपन
