STORYMIRROR

Sarita Dikshit

Abstract Comedy Inspirational

4  

Sarita Dikshit

Abstract Comedy Inspirational

चमचे

चमचे

1 min
360

चमचों की क्या बात करूं

उनकी महिमा है अपरम्पार

जिनकी बुद्धि का पार नहीं

जुगाड़ों में भी जुगत अपार


जो भी हो पात्र भरा सम्मुख

उनको खाली कर जाते हैं

जब काम निकल जाए इनका

खाली भांडा  ये बजाते हैं


अपने मतलब के लिए तो ये 

औरों की भी मिट्टी खोदें

खिलने को मनचाही हसरत

गैरों के लिए कांटे बो दें 


ये चमचे प्रायः दफ्तर के

हर शाखा में मिल जाते हैं

जिन्हें देख हर बॉस की 

आशाओं के पर लहराते हैं


पर बॉस को भी मालूम नहीं

करते कैसी-कैसी ये कपट

बॉस के संरक्षण में रहकर

बॉस को ही लगाए चपत


ये ऐसे कौम से आते हैं

अदृश्य आरक्षण जो पाएं 

बॉस को भी अदले-बदले

गर नया ये मौका पा जाएं


ये शिकार उनका करते

जो लाभ इन्हें पहुंचाते हैं 

तलवे भी उनकी चाटे ये

जो काम में इनके आते हैं 


मक्खनबाजी का गुण लेकर

ऑफिस की शान बढ़ाते हैं

जो इस गुण से नावाकिफ हो

एड़ी घिसते रह जाते हैं


ना इनका सच्चा मित्र कोई

ना ही कोई पक्का दुश्मन

ये अपने तुच्छ मुनाफे पर

समर्पित कर देते तन मन,


इन्हीं योग्यता के बल पर

ये ऊंचा पद भी पा जाते

जो कर्म को धर्म समझते हैं

उनको ये सीख सिखा जाते


नहीं निपुणता आवश्यक

ऊंचा मकाम पाने के लिए

बॉस का चमचा बन जाओ

किस्मत चमकाने के लिए


तेल लगाने का गुर सीखो

इससे बड़ा ना कोई हुनर

तरक्की यूं ही पा जाओगे

नारी हो, चाहे हो नर

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract