Priyanka Gupta
Abstract Inspirational
यादों का सबसे ख़ूबसूरत पहलू है उनका सृजन
क्यूँकि यादें उन्हीं लोगों के साथ सृजित होती हैं
जो हमारे दिल के बेहद करीब होते हैं।
थमना है
थमना
ठहर जाना
प्रेमविहीन जी...
खुराक सपनों क...
सहअस्तित्व
वर्तमान
कभी सोचा नहीं
तुम्हारा साथ ...
याद आते हो
आज लगता है जैसे वो बिखरे मोती तराशा हुआ... आज लगता है जैसे वो बिखरे मोती तराशा हुआ...
प्यार आदर और भाईचारे के पाठ भी इन बंद मुट्ठियां से शुरू होते हैं इन बंद मुट्ठी में तो साहब ... प्यार आदर और भाईचारे के पाठ भी इन बंद मुट्ठियां से शुरू होते हैं इन बंद ...
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हमसे बढ़कर दूसरा कोई ज्ञानी नहीं होता हो ही नहीं सकता ...। हमसे बढ़कर दूसरा कोई ज्ञानी नहीं होता हो ही नहीं सकता ...।
ख़्वाबों की बैसाखी से ही यहाँ तक आ पाया हूँ वरना दुनिया ने तो पहले ही अपाहिज कर रखा था। ख़्वाबों की बैसाखी से ही यहाँ तक आ पाया हूँ वरना दुनिया ने तो पहले ही अपाहिज ...
पाठ शाला का साथी मोहल्ले की यारी दो पहर का घूमना कैरी, अमरूद की चोरी कब्बडी, चोर-पुलिस या गि... पाठ शाला का साथी मोहल्ले की यारी दो पहर का घूमना कैरी, अमरूद की चोरी कब्ब...
हौसलों की उड़ान में,इरादों को मकसद बनाकर तो देखो। प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से कदम उठाकर तो देखो। ... हौसलों की उड़ान में,इरादों को मकसद बनाकर तो देखो। प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से ...
जब कभी ग़रीबी ने आकर जीना मुश्किल कर डाला हो मज़बूरी और लाचारी ने मिल कर स्वप्नों को पाला हो। जब कभी ग़रीबी ने आकर जीना मुश्किल कर डाला हो मज़बूरी और लाचारी ने मिल कर ...
फिर मत कहना, समय रहते ... मैंने कहा नहीं ! फिर मत कहना, समय रहते ... मैंने कहा नहीं !
क्यों की न हम कभी सृष्टि को कुछ दे पाये हैं, और न कभी कुछ दे पायेंगे और न कभी कुछ दे पायेंगे ! क्यों की न हम कभी सृष्टि को कुछ दे पाये हैं, और न कभी कुछ दे पायेंगे और न कभी...
जलो मत बराबरी की कोशिश करो, क्रिकेट नहीं भारत की सोच को घेरो। जलो मत बराबरी की कोशिश करो, क्रिकेट नहीं भारत की सोच को घेरो।
नदी-सा बहना सीखो कहते चतुर सयाने, पर बहाव में ही अस्तित्व कोई यह न माने... नदी-सा बहना सीखो कहते चतुर सयाने, पर बहाव में ही अस्तित्व कोई यह न माने...
जब कोई मुश्किल हुई सुनकर मैं पहुंचा दौड़कर सोचे करे बर्बाद मुझको समय रहते तोड़कर था बुझाने का ... जब कोई मुश्किल हुई सुनकर मैं पहुंचा दौड़कर सोचे करे बर्बाद मुझको समय रहते तोड...
नेह के दाने तलाशती उदास फुदकती। नेह के दाने तलाशती उदास फुदकती।
ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा। ए `प्राण` बुढापे का निरादर नहीं करना इक रोज़ हरिक शख्स को आता है बुढ़ापा।
माटी की सौंधी सुगंध का एहसास कराती हैं। माटी की सौंधी सुगंध का एहसास कराती हैं।
पर यहाँ तुम्हारी ही तरह कई और लोग खड़े हैं पाषाण युग के तेज़ हथियार लिए उनमें और तुममे... पर यहाँ तुम्हारी ही तरह कई और लोग खड़े हैं पाषाण युग के तेज़ हथियार ल...
तमाशबीनी का अधिकार भी, मिलना चाहिए वैसे। तमाशबीनी का अधिकार भी, मिलना चाहिए वैसे।
आज भी वे कविताएं अपनी गूँज लिए रसोई में रहती हैं जहाँ माँ कविता बनाया करती थी। आज भी वे कविताएं अपनी गूँज लिए रसोई में रहती हैं जहाँ माँ कविता ...
मूक रहो कुछ ना बोलो, तब भी सब समझ ही जाते हैं हम नही समझते हैं कुछ भी, ये सोच के सब इठलाते हैं मूक रहो कुछ ना बोलो, तब भी सब समझ ही जाते हैं हम नही समझते हैं कुछ भी, ये सोच...