Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here
Independence Day Book Fair - 75% flat discount all physical books and all E-books for free! Use coupon code "FREE75". Click here

Kavita Verma

Abstract


4  

Kavita Verma

Abstract


ठहराव

ठहराव

1 min 328 1 min 328


सिर्फ टूटी हुई दीवारों से 

नहीं बनते खंडहर 

सजे हुए महलों में भी 

खंडहर सांस लेते हैं। 


लोगो के चले जाने से 

नहीं होती वीरानियाँ 

महफ़िलों में भी 

वीरानियाँ ठहाके लगाती हैं।


रिश्तों के टूटने से ही 

नहीं होता दर्द 

जुड़ने की ख़ुशी में भी 

दर्द कराहता है। 


टूटन सिर्फ रिश्तों के 

दरकने से नहीं होती 

रिश्ते के ठहर जाने में भी 

कुछ दरक जाता है। 


एहसास किसी के होने का 

न होने से जुदा होता है 

होकर न होने का 

एहसास तोड़ देता है। 



Rate this content
Log in

More hindi poem from Kavita Verma

Similar hindi poem from Abstract