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Veena rani Sayal

Fantasy

4  

Veena rani Sayal

Fantasy

कविता

कविता

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  दूर, बहुत दूर चले जाना है

  जीवन के उस मोड़ पर

  किसी को न संग जाना है

   

  दिन गए रातें गईं

  कई पतझड़, बहार बन चले गए

  इन सबसे बेखबर तेरी छवि पर

  सिलवटें न डाल सके


  फुरसत की घड़ियों में देखा

  वही चेहरा,वही है सादगी

  उम्र तमाम होने को है

  इक याद तेरी है वही।


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