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Veena rani Sayal

Abstract

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Veena rani Sayal

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चंदा की चांदनी संग

चंदा की चांदनी संग

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चंदा की चांदनी संग

तारों की छांव में

दिले-मुसाफिर चला

अंजान राहों में


न आगे कोई पीछे

न कोई दायें बायें

सुनसान रास्ते पर

दिले-मुसाफिर चला

मंजिल की चाह में


यादों का कारवां बना

हमसफर राह में

हर भूल को भुला कर

दिले - मुसाफिर चला

मंजिल की चाह में


मंजिल मिले न मिले

चलना है उम्र भर

सांसों का काफिला है संग 

मंजिल की चाह में



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