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Veena rani Sayal

Fantasy

3  

Veena rani Sayal

Fantasy

कविता

कविता

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हसरतों की एक कली दिले गुलशन में मुस्काई

बैरी भंवरा बन गया यह जग, पल में वो मुरझाई ।


हसरत थी कि बन कर पंछी दूर गगन उड़ जाऊं

नील गगन की छांव में छोटा सा नीड़ बनाऊं।


हसरत थी कि सपनों से एक नई दुनिया बसाऊं

रूप का न हो वहां ठिकाना, सीरत की हो वाहवाही


हसरतें पूरी कहां हुई हैं, हसरत ने मात है खाई 

जब तक सांस है, हसरत देखो उमड़ उमड़ कर आई



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