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Jalpa lalani 'Zoya'

Fantasy

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Jalpa lalani 'Zoya'

Fantasy

कविता हमें रच रही है

कविता हमें रच रही है

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दिल के जज़्बातों को कागज़ पर सजा रही है

मन के अल्फ़ाज़ों को कलम से बयां कर रही है


आँखों मे छिपी भावनाओं को स्याहि से निखार रही है

लबों से अनकही बातों को हर जुबां गुनगुना रही है


ज़िंदगी को फूल बनाकर खुशबू चारों ओर फैला रही है

ऐसा लगता है जैसे हम नहीं, कविता हमें रच रही है।


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