STORYMIRROR

Jalpa lalani 'Zoya'

Fantasy

4  

Jalpa lalani 'Zoya'

Fantasy

कविता हमें रच रही है

कविता हमें रच रही है

1 min
420

दिल के जज़्बातों को कागज़ पर सजा रही है

मन के अल्फ़ाज़ों को कलम से बयां कर रही है


आँखों मे छिपी भावनाओं को स्याहि से निखार रही है

लबों से अनकही बातों को हर जुबां गुनगुना रही है


ज़िंदगी को फूल बनाकर खुशबू चारों ओर फैला रही है

ऐसा लगता है जैसे हम नहीं, कविता हमें रच रही है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy