STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Romance Fantasy

4  

aazam nayyar

Abstract Romance Fantasy

भारत

भारत

1 min
249

फ़ूलों से महके मेरे देश की धरती

तितली भौंरे मंडराए गुलशन में ही


है गंगा जमना का संगम दोस्त यहां 

धारा बहती है उल्फ़त की हर दिल में 


उगले है गेहूं चावल मक्का लोगों  

मेरे देश की धरती है ये प्यारी


है सुंदर वादी फ़ूलों की ये ख़ुशबू

है पहचान वतन की मेरे ये लोगों


 आते मौसम सर्दी गर्मी बरसाते

 मेरे देश की धरती की सुंदरता ये


गीत ग़ज़ल उल्फ़त की ख़ुशबू है आज़म 

महके प्यारी धरती उल्फ़त की धुन में।

आज़म नैय्यर 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract