STORYMIRROR

VIVEK ROUSHAN

Abstract

3  

VIVEK ROUSHAN

Abstract

इक चराग बुझा हुआ

इक चराग बुझा हुआ

1 min
205

कैसे दिखाएँ दुनिया क़ो इक दिल दुखा हुआ

जो कुछ हुआ मेरे साथ में बहुत बुरा हुआ


जलता रहा मेरा ये दिल यूँ ही तमाम रात

तमाम रात जलता रहा इक चराग बुझा हुआ


तोड़े गए फूलों के यहाँ खरीददार हैं बहुत

कुचला गया उस फूल को जो था टूटा हुआ


मेरे उसके दरमियाँ सब फासले अना के हैं

वरना अपनी जान से कब कौन खफा हुआ


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract