STORYMIRROR

Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Abstract

3  

Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Abstract

अनोखा पंछी

अनोखा पंछी

1 min
416

पंछी अनोखा

आया मेरे आँगन में

बोले मीठी सी बोली

बैठे आकर बारंबार

मेरी ही खाने की थाली में

प्याला जो देखा जल का मेरा

चोंच मारे उस प्याली में

समझ गई मैं

माँग रहा था अन्न और जल

वह अपनी प्यारी

मीठी - सी बोली में

गृहण करके अन्न जल वह

लगा चहकने सुर ताल लगाकर

महक़ा दिया आँगन और जीवन मेरा

उस प्यारे से पंछी ने

आया अनोखा प्यारा सा पंछी

आज मेरे आँगन में ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract