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ANCHAL PANCHAL

Abstract

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ANCHAL PANCHAL

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मां मुझे तेरी बहुत याद आती है

मां मुझे तेरी बहुत याद आती है

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मुझे धरती पर लाने वाली पाल पोसकर बड़ा करने वाली

और तो और गुस्से में भी मुझपे प्यार बरसाने वाली

कोई और नहीं एक मां याद आती है 

मुझे चिंता में देख अपनी परेशानी भुलाके मुझे सहारा देने वाली 

घंटो घंटो मेरे लिए रात में जागकर अपनी नींद कुर्बान करने वाली

कोई और नहीं एक मां याद आती है


एक बार उनसे पूछिए जिनके पास मां नही होती 

एक मां तू ही तो है जिसकी कमी किसी से पूरी नहीं होती 

मेरे नाराज होने पर मुझे मानती है 

कभी पापा की डाट से बचाती है 

मुझे मनाने के चक्कर में खुद नाराज होकर बैठ जाती है


मां मुझे तेरी आज बहुत याद आती है 

आज तू मुझे थोड़ी दूर पर मां तू मेरे दिल के हमेशा करीब है

तेरे आँचल पकड़कर चलने को अब जी चाहता है

तेरे साए से लिपट जाऊं ऐसा मेरा मन कहता है

आपने बच्चो के लिए तो तेरे दिल में हमेशा से एक अलग जगह होती है

मां आज मुझे तेरी बहुत याद आती है


तेरी मधुर लोरी की आवाज आज भी मेरे कानो में सुनाई देती है 

वो बेसन की सोंधी रोटी पर माखन और खट्टी चटनी जैसी मां याद आती है 

तेरी गोद में सोते हुए वो प्यार की थपकियां याद आती है 

और परेशानी में भी तेरे मासूम चेहरे की मुस्कान याद आती है 

तू कैसे कर लेती है इतना सब 

मां मुझे तेरी एक एक बात याद आती है

मां मुझे तेरी एक एक बात याद आती है।


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