V. Aaradhyaa
Classics Fantasy Inspirational
कभी धूप को गले लगाती
कभी तिमिर में सकुचाती है,
यूँ टुकड़ों में बँटकर ही
ज़िन्दगी गुज़र जाती है।
अनंत उजास
गणेशाय नम :
गणेशाय
तीज
ज़िन्दगी
सूर्योदय
विरह भरी राते...
मर्यादा के प्...
महिमा अपार
मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ
मुक्ति प्राप्त करते लोग इससे वो बस थोड़ा भूभाग प्राप्त करें मुक्ति प्राप्त करते लोग इससे वो बस थोड़ा भूभाग प्राप्त करें
ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बंद हो गई नाग और चन्... ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बं...
पाप ही मूल कारण है मनुष्य फिर भी समझे न ये। पाप ही मूल कारण है मनुष्य फिर भी समझे न ये।
तीव्र वेग से वह्नि आती क्या तुम तनकर रहते हो? तो भूतेश से अश्वत्थामा क्यों ठनकर यूँ तीव्र वेग से वह्नि आती क्या तुम तनकर रहते हो? तो भूतेश से अश्वत्थामा क्यों ठ...
रासोत्सव के दर्शन की लालसा से उनके मन वश में नहीं थे रासोत्सव के दर्शन की लालसा से उनके मन वश में नहीं थे
पर कभी तो एसा होगा एक दिन मैं नहीं लौटूंगा। पर कभी तो एसा होगा एक दिन मैं नहीं लौटूंगा।
शत शत प्रणाम हे पूज्य संत , दोषों को मेरे क्षमा करना शत शत प्रणाम हे पूज्य संत , दोषों को मेरे क्षमा करना
गोरा बादल मिट जाएगा नहीं मिटेगी शान राजपूतानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी। गोरा बादल मिट जाएगा नहीं मिटेगी शान राजपूतानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी।
तुम्हे राम छुड़ाने आयेगें। सीते तुम विश्र्वास रखो ... तुम्हे राम छुड़ाने आयेगें। सीते तुम विश्र्वास रखो ...
राजा परीक्षित ने पूछा, भगवन सुनाईये अब कृपाकर आप मुझे। राजा परीक्षित ने पूछा, भगवन सुनाईये अब कृपाकर आप मुझे।
योगसाधना पूर्ण होने से पहले यदि साधक रोगादि उपद्रवों से पीड़ित हो योगसाधना पूर्ण होने से पहले यदि साधक रोगादि उपद्रवों से पीड़ित हो
चलो आज आपको एक पौराणिक कथा सुनाते हैं, विष्णु और लक्ष्मी जी के विवाह पर लेकर जाते हैं। चलो आज आपको एक पौराणिक कथा सुनाते हैं, विष्णु और लक्ष्मी जी के विवाह पर लेकर...
युद्ध भयंकर हो रहा देखो,चल रहे तीरन पर खूब तीर। युद्ध भयंकर हो रहा देखो,चल रहे तीरन पर खूब तीर।
दुर्वाशा जी, कल्याण हो आपका पास जाइये, राजा अम्बरीष के तभी आपको शांति मिलेगी क्षम दुर्वाशा जी, कल्याण हो आपका पास जाइये, राजा अम्बरीष के तभी आपको शांति मि...
तुमसे मिलने को शायद मैं बेमतलब ही लालायित थी। तुमसे मिलने को शायद मैं बेमतलब ही लालायित थी।
शक्ति आजमाने को अपनी, महिषासुर था आतुर सा। शक्ति आजमाने को अपनी, महिषासुर था आतुर सा।
यह भी समझ नहीं पाते, धृतराष्ट्र पुत्रों को माधव, नहीं मारना चाहूं यादव। यह भी समझ नहीं पाते, धृतराष्ट्र पुत्रों को माधव, नहीं मारना चाहूं यादव।
एकाकी मैं रह गई, कैसा यह व्रजपात। मन मेरा अब रिक्त है, मन में झंझावात।। एकाकी मैं रह गई, कैसा यह व्रजपात। मन मेरा अब रिक्त है, मन में झंझावात।।
सतयुग के अंत में घोर संग्राम हुआ देवताओं का दानवों के साथ में सतयुग के अंत में घोर संग्राम हुआ देवताओं का दानवों के साथ में