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Mayank Kumar

Classics

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Mayank Kumar

Classics

नया दिन है

नया दिन है

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नया दिन है, हाल नया है

सपनों का, एहसास नया है

छोड़ो अब बीते कल की यादें


नया दिन है पांव पसारा,

मरीची भी कुछ नया-नया-सा

कोयल भी कुछ नई गान में,


चलो आज के अंक में बैठे

सुनहरे ख़्वाब को पूरा करने,

नए साल में, नए ताल में..

नया दिन है, हाल नया है


बहुत पंथ के घर में बैठा

कुछ न जाना, कुछ न सीखा

बस घुमा है मन हमारा,


थका-थका यह हारा हारा

चलो नई शुरुआत करते हैं

नया दिन है, हाल नया है


एक पंथ के हाथों को पकड़े

जीवन का सारा अज्ञान मिटाएं

क्या खोया है, क्या पाया है,

पुरानी सारी याद मिटाएं


पाणिनि सा अब बनते हैं

नए जीवन को अब चुनते हैं

नया दिन है, हाल नया है।


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