STORYMIRROR

Sujata Kale

Abstract

3  

Sujata Kale

Abstract

नीलमोहर

नीलमोहर

1 min
408

नील गगन से

यह नीलमोहर

जाने क्या क्या

बात करें।


आसमान को

अपना रंग देकर

फिर आकर

धरती से मिले।


शाखाओं पर

आसमान ही

लेकर अपने

साथ चले।


फिर क्यों धूल में

नीलाभ बनकर

धरती पर आँचल

ओढ़ चले।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract