STORYMIRROR

Sujata Kale

Abstract

4  

Sujata Kale

Abstract

गुलमोहर

गुलमोहर

1 min
767

लाल साफा बाँधा है,

या पूर्व दिशा ही पहनी है!

सूरज की अटारी


पर रहते हो,

या सूरज ही

तुम पर बसता है।


डाल डाल की लालिमा

पात पात को

छुपाती है।


गुलमोहर तू यह तो

बता सिन्दूरी बन

क्यों बसते हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract