Sujata Kale
Abstract
लाल साफा बाँधा है,
या पूर्व दिशा ही पहनी है!
सूरज की अटारी
पर रहते हो,
या सूरज ही
तुम पर बसता है।
डाल डाल की लालिमा
पात पात को
छुपाती है।
गुलमोहर तू यह तो
बता सिन्दूरी बन
क्यों बसते हो।
देख तेरे शहर ...
नायाब पत्थर ...
तुममें और चाँ...
नीलमोहर
अमलतास
गुलमोहर
सुन ऐ जिंदगी ...
तुम न आना भूल...
अब के पतझड़ म...
इन्सान देखो क...
आंखें धुंधली सी हो गई है अब तो रश्मियां भी भीगने लगी है। आंखें धुंधली सी हो गई है अब तो रश्मियां भी भीगने लगी है।
उनके कंधों की बदौलत बढ़ रही है जिंदगी ! उनके कंधों की बदौलत बढ़ रही है जिंदगी !
आलोकित करता जाता हूं, साथ अपने रोने को गीत पुराने गाता हूं। आलोकित करता जाता हूं, साथ अपने रोने को गीत पुराने गाता हूं।
हमारे ही हर भाव में ही फिर क्यूँ गँवाते हो अपने ईमान को। हमारे ही हर भाव में ही फिर क्यूँ गँवाते हो अपने ईमान को।
तू भामण्डल का स्वर्णिम भाग है तू कुदरत की उत्कृष्ट कृति है। तू भामण्डल का स्वर्णिम भाग है तू कुदरत की उत्कृष्ट कृति है।
धैर्य न खोना बस ये सोचना तू भी किसी का सहारा है धैर्य न खोना बस ये सोचना तू भी किसी का सहारा है
माँ, बहन, सखी, पत्नी चलाती संसार सारा। माँ, बहन, सखी, पत्नी चलाती संसार सारा।
इतनी बस इस माँ की दुआ है कि तू देश की शान बने। इतनी बस इस माँ की दुआ है कि तू देश की शान बने।
जो दांव पर लगाए मुझे पति, ऐसे पति को उसी पल छोड़ दूँ। जो दांव पर लगाए मुझे पति, ऐसे पति को उसी पल छोड़ दूँ।
जैसे जीने की वजह दे गई जैसे जीने की वजह दे गई
तो मैंने यूँ इसी बहाने रिश्तों की ग्यारहवी और तेरहवीं भी देख ली। तो मैंने यूँ इसी बहाने रिश्तों की ग्यारहवी और तेरहवीं भी देख ली।
आखिर कहाँ बेटी को उसका घर महफूज़ मिला है ? आखिर कहाँ बेटी को उसका घर महफूज़ मिला है ?
उम्र का ये मोड़ है ऐसा सब थोड़ा झल्लाते होंगे ! उम्र का ये मोड़ है ऐसा सब थोड़ा झल्लाते होंगे !
तुम्हारे होने का एहसास है माँ मेरा तुम्हें शत -शत प्रणाम है। तुम्हारे होने का एहसास है माँ मेरा तुम्हें शत -शत प्रणाम है।
वो दिन दूर नहीं, जब स्वर्ग सी धरती होगी बंजर श्मसान। वो दिन दूर नहीं, जब स्वर्ग सी धरती होगी बंजर श्मसान।
रेत अबीर और गुलाल के रंग में रंग गई देखो बसंत आ गई। रेत अबीर और गुलाल के रंग में रंग गई देखो बसंत आ गई।
आज कल की महिला ख़ुद भी बहुत बे-दार है। आज कल की महिला ख़ुद भी बहुत बे-दार है।
वही रंग कुछ यूं मलना है कि जो आये रंग की जद में। वही रंग कुछ यूं मलना है कि जो आये रंग की जद में।
सौंदर्यरूपी चहचाहट को सुनने के लिए आतुर होगी। सौंदर्यरूपी चहचाहट को सुनने के लिए आतुर होगी।
मुसीबतों से टूट जाए जो वो तू इंसान नहीं। मुसीबतों से टूट जाए जो वो तू इंसान नहीं।