शायरी
शायरी
जज्बात की किताब के
हर पन्ने पे तेरा नाम लिखा
तन्हाई के मंजर को लफ्जों में बयान किया
गमगीन सहर और रातों में
दिल हंसता भी रहा रोता भी रहा
कुछ पन्ने खाली छोड़ दिए
लफ्जों ने जब दम तोड़ दिया
कुछ कह न सका कुछ लिख न सका
जब खालीपन का एहसास हुआ
ख्वाबों का है फलसफा
मोहब्बत का इसे नाम दिया
खूने जिगर की स्याही से
चंद लफ्जों में पैगाम दिया।
