STORYMIRROR

मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract

3  

मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract

बहलता है मन

बहलता है मन

1 min
196

बहलता है मन तो बहल जाने दो ना।

मचलता है मन तो मचल जाने दो ना।


करीब आकर बैठे हो अभी अभी तुम तो ।

सहलता है दिल तो सहल जाने दो ना।


अभी अभी आया करीब दिल तुम्हारे।

टहलता है दिल तो टहल जाने दो ना।


अभी अभी तो तुमने हाँ की है हमसे।

उछलता है मन तो उछल जाने दो ना।


अभी अभी पास से देखा है तुमको।

पिघलता है दिल तो पिघल जाने दो ना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract