मानव सिंह राणा 'सुओम'
Abstract
खोये बिछड़े, बिछड़े खोये, तब भी शोर मचाएंगे।
मौतों पर भी वही सियासत करते घोर ये आएंगे।
राजनीति के तलुये चाटे इनका काम मचाना शोर,
सनातन का संगम जब होगा तब ही शोर मचाएंगे।
बाकी नहीं
मोदी नाम नहीं...
🌸 मेरे साँवरे...
बरसाने वाली म...
शीश के दानी
गजानन रखो लाज
शहीद
सनातन का संगम
क्यूँ जलाते ह...
हर दिल में गर्व सम्मान का चमत्कार है हमारी लक्ष्मी का बेटा जिले सुबेदार है हर दिल में गर्व सम्मान का चमत्कार है हमारी लक्ष्मी का बेटा जिले सुबेदार है
उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है। उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है।
अपने से दूर रखने का इंतजाम करते जा रहे हैं। अपने से दूर रखने का इंतजाम करते जा रहे हैं।
बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम। बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम।
ये एक ही ज़िंदगी में कई ज़िंदगियाँ जी लेती है। ये एक ही ज़िंदगी में कई ज़िंदगियाँ जी लेती है।
दुनिया तरक़्क़ी कर रही है साहिब! मेरा देश विकास कर रहा है दुनिया तरक़्क़ी कर रही है साहिब! मेरा देश विकास कर रहा है
अगली पीढ़ी के लिए मौत का उपहार अपने ही हाथों से तैयार कर रहे हैं। अगली पीढ़ी के लिए मौत का उपहार अपने ही हाथों से तैयार कर रहे हैं।
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं। जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं।
ये फफककर रो पडेंगी बेआवाज देर तक रोती रहेंगी, इनके हिस्से का सुख बस इतना सा है। ये फफककर रो पडेंगी बेआवाज देर तक रोती रहेंगी, इनके हिस्से का सुख बस ...
कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते ! कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते !
क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं। क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं।
कुछ देर लगी इस नए सबक को समझने में, काफी देर लगी सच्चे रिश्ते को समझने में। कुछ देर लगी इस नए सबक को समझने में, काफी देर लगी सच्चे रिश्ते को समझने में।
विरासत विरासत
अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम
अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है। फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है।
मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है। मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है।
इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है। इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है।