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मानव सिंह राणा 'सुओम'

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

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शीश के दानी

शीश के दानी

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शीश के दानी, जग के कल्याणी, जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। तीन बाण धारी, नीले के असवारी, कष्ट मिटाओ मेरे, बाबा कष्ट मिटाओ मेरे। **(अंतरा 1)** हाथ में तीर कमान सुहाए, खाटू में दरबार लगाए, जो भी दर पे श्रद्धा से आए, वो खाली हाथ न जाए। हारे का सहारा, नाम है तुम्हारा, पार करो नैया, प्रभु पार करो नैया। तीन बाण धारी, नीले के असवारी... **(अंतरा 2)** मोरछड़ी का झाड़ा प्यारा, मिटाए विपदा का अंधियारा, अमृत रस बरसाए निरंतर, श्याम नाम का प्यारा नारा। दीन-दुखी जन को, धीरज बंधाते, तुम हो दया के सागर, प्रभु तुम हो दया के सागर। तीन बाण धारी, नीले के असवारी... **(अंतिम छंद - कवि सुओम)** कर जोड़ खड़ा है द्वार पे तेरे, 'सुओम' कवि अज्ञानी, महिमा तेरी गा गा कर, माँगे भक्ति वरदानी। चरणों में रख लो, शरण में ले लो, अब तो सुध लो मेरी, बाबा अब तो सुध लो मेरी। तीन बाण धारी, नीले के असवारी, कष्ट मिटाओ मेरे, बाबा कष्ट मिटाओ मेरे। जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।


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