गजानन रखो लाज
गजानन रखो लाज
आओ गजानन मेरे द्वार, मंगल कर दो आज। विघ्न हरो हे गणनायक, रख लो मेरी लाज।। आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥ अंतरा 1 : माथे चंदन, सूँड सुहानी, शोभा अपरंपार। मूषक वाहन साथ तुम्हारे, भर दो सुख-भंडार। मोदक का मैं भोग लगाऊँ, प्रेम भरा है साज। आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥ अंतरा 2 : पहली पूजा जग में पाते, तुम हो प्रथम महान। तेरे नाम से शुभ हो जाता, जीवन का अभियान। अज्ञानों में दीप जलाकर, बना दो नया समाज। आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥ अंतरा 3 : दूर्वा, अक्षत, पुष्प चढ़ाऊँ, करूँ चरण प्रणाम। संकट सारे दूर भगाओ, सिद्ध करो सब काम। दीन-दुखी की सुन लो विनती, बना दो बिगड़े काज। आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥ अंतरा 4 : बुद्धि और शक्ति भी देना, निर्मल कर दो मन। सेवा, प्रेम, करुणा को भर दो, पावन हो जीवन। हर पल गूँजे नाम तुम्हारा, यही रहे आवाज़। आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥ अंतरा 5 : जब-जब जग में घोर अँधेरा, तुमने राह दिखाई। भक्तों की नैया तूने ही, भवसागर से पार लगाई। तेरी कृपा से खिल उठता है, सूना हर इक साज। आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥ समापन : जय गणपति, जय विघ्नहर्ता, जय मंगल के धाम। हर श्रद्धा स्वीकार करो प्रभु, सुओम जपे तेरा नाम। भक्ति का यह दीप जलाकर, करें सभी आगाज़। आओ गजानन मेरे द्वारे मंगल कर दो आज॥ आओ गजानन मेरे द्वारे, मंगल कर दो आज॥
