मोदी नाम नहीं, हुंकार है
मोदी नाम नहीं, हुंकार है
रणभेरी की गूँज बना, जन-जन का जयघोष अपार है,
हर भारतवासी के मन में जागा नव स्वाभिमान अपार है।
राष्ट्रधर्म की राह चले, वही युग का सच्चा सरदार है,
मोदी नाम नहीं, हुंकार है।
आँधियों से जो टकराए, पर्वत-सा जिसका आकार है,
संकट जिसके सम्मुख झुक जाए, ऐसा अटल विचार है।
दुश्मन भी जिसका नाम सुनें, समझें अडिग ललकार है,
मोदी नाम नहीं, हुंकार है।
सीमा पर प्रहरी का साहस, खेतों का हरित विस्तार है,
युवा शक्ति के मन में जागा नवभारत का सत्कार है।
जन-जन के विश्वासों का वह अटल और दृढ़ आधार है,
मोदी नाम नहीं, हुंकार है।
विश्व पटल पर ऊँचा लहराए भारत का गौरव अपार है,
हर उपलब्धि के पीछे दिखता श्रम, संकल्प और संस्कार है।
आत्मनिर्भर भारत का बढ़ता हर कदम विजय-उद्गार है,
मोदी नाम नहीं, हुंकार है।
सेवा जिसका धर्म बना, कर्म ही जिसका श्रृंगार है,
राष्ट्रहित में अर्पित जीवन, यही सच्चा सत्कार है।
जन-जन की उम्मीदों का वह अटल अवतार है,
मोदी नाम नहीं, हुंकार है।
वंदे मातरम् की गूँज लिए बढ़ता भारत हर बार है,
एकता, श्रम और स्वाभिमान ही नवयुग का आधार है।
भारत माँ के चरणों में अर्पित जीवन का हर संस्कार है,
मोदी नाम नहीं, हुंकार है।
जय हिंद! वंदे मातरम्! 🇮🇳
✍️ रचनाकार: मानव सिंह राणा 'सुओम'
