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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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दीपोत्सव

दीपोत्सव

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संस्कृति का दीप लेकर।

 विश्वास की बाती तेल में डुबोकर।

 संकल्प की तीली से।

 आत्मविश्वास की लौ जलाई है। 

 ज्योतिर्मय दीवाली आई है।


माला का छोर अनंत हो।

 एकता का न कभी अंत हो।

 सोखकर तिमिर ज्ञान प्रकाश हो।

 घर-घर में उल्लास हो।

 सर्व हित में संस्कृति दीप हो।  

 जीवन की मुस्कान टिमटिमाती हो।

 दिव्यता का हर पल आभास हो।

 सत्य में आस्था सत्य के साथ हो।


सबकी दुआएं मिलती रहे।  

 खुशियां यूं ही बढ़ती रहे।

 दीवाली को सही अर्थ मिले।

  हर चेहरे पर मुस्कान खिले।



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