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Dr Pragya Kaushik

Abstract

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Dr Pragya Kaushik

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बेटियां तो सांझी होती हैं

बेटियां तो सांझी होती हैं

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बेटियां तो साझी होती हैं

एक अपशब्द भी मान में उनके

तीर -सा अन्तस को भेद जाता है उनके

और न जाने कितने ही अरमानों की बलि ले ले लेता है 

अपने ही अहम में।


बेटियां तो वरदान होती है सर्व शक्ति 

का फरमान बन घर आंगन को रोशन करती है

एक लम्हा भी उनसे बेरुखी का

खाली कर जाता है झोली आशीर्वाद की तुम्हारी ।


बेटियाँ तो मां पापा की जान होती हैं

एक प्रेरित आह्वान भी होती हैं

एक बोल भी प्यार का तर देता

है उनके मन मस्तिष्क को।

और छलका जाता है प्रेम

उनके हर सम्मान में ।



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