STORYMIRROR

Dr Pragya Kaushik

Others

4  

Dr Pragya Kaushik

Others

हिन्दी हूं मैं वतन की

हिन्दी हूं मैं वतन की

1 min
225

हिंदी हूं मैं वतन की

कहानी मेरे मान की है

हम सब के अभिमान की है

राज भाषा बनूं या बनूं मैं राष्ट्र भाषा 

बात मेरे यत्न सिंचित उन्मान

की है।


मैंने तो बांधा बंधु -बांधव को

एक माला के भिन्न मोती सा,

मुझसे जुड़े सभी भारतीय 

एक मां की अनमोल संतति सा,

फिर क्यों दंश परायों सा 

देते यंहा कुछ इन्सान मुझे हैं?

क्या प्रेम में मेरे कोई कमी है

या मिठास ही ये पराई सी लगे है?


परदेस में भी प्यार मिले मुझे 

पर भारतीय सभी क्यों न मेरे साथ खडे हैं?

हिन्दी हूं मैं वतन की

कहानी मेरे प्रतिमान की है

आह्वान करूं में एकजुट होने का

अभिलाषा मेरे अभिमान की है

और कमान

मेरे गौरव के संचार की है।

हिन्दी हूं मैं वतन की

कहानी मेरे आयुष्मान

की है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन