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Bhoop Singh Bharti

Tragedy

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Bhoop Singh Bharti

Tragedy

कुण्डलिया : "महँगाई"

कुण्डलिया : "महँगाई"

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महँगाई लूटण लगी, बाकी बचा न शेष।

ऐसी तैसी हो गई, रोवै  सारा  देस।


रोवै  सारा  देस, क्ळेस यो होग्या भारी।

महँगाई की आग, जळावै खुशियां सारी।


हुई आठ सौ साठ, गैस  इब  मेरे  भाई।

घणा बढा यो तेल, तेल काढै  महँगाई।


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