Bhoop Singh Bharti
Action
सारा कुणबा खप गया, न्यारा था बलिदान।
चिड़ी लड़ाई बाज तै, मिटा दिया अभिमान।।
मिटा दिया अभिमान, औरंगजेब छकाया।
बणा खालसा पंथ, धर्म का मान बढ़ाया।।
सवा लाख पै एक, शेर यो पड़गा भारा।
कर रहा देस नमन, गुरु गोबिंद नै सारा।।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
पर संयम की भी सीमा है, आख़िर मिट्टी मेरी माँ है पर संयम की भी सीमा है, आख़िर मिट्टी मेरी माँ है
सोचते तो यही है हम देखते हैं कालखंड में लिखा है क्या। सोचते तो यही है हम देखते हैं कालखंड में लिखा है क्या।
जिनके अधरों पे मुस्कान सदा, मृत्यु को जीवन देते हैं जिनके अपने जीवन भर चौखट पे ऑंखें तकते हैं जिनके अधरों पे मुस्कान सदा, मृत्यु को जीवन देते हैं जिनके अपने जीवन भर चौखट पे ...
बेटी का बाप पत्थर पर सिर पिटता है। खबर यह सारे शहर में बिकती है। बेटी का बाप पत्थर पर सिर पिटता है। खबर यह सारे शहर में बिकती है।
एक सुखी समय देने से पहले समय माङ्गता है प्रमाण। प्रश्न अब भी है वही है क्या तुम उठाओगे कृ... एक सुखी समय देने से पहले समय माङ्गता है प्रमाण। प्रश्न अब भी है वही है ...
मंज़िल मिलेगी क्यों नहीं ! मंज़िल मिलेगी क्यों नहीं !
धन्यवाद है आपका कि आपने हमको प्लेटफार्म दिया धन्यवाद है आपका कि आपने हमको प्लेटफार्म दिया
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, यही हैं जिनके चार धाम, ऐसे अजेय सैनिकों को, मेरा सलाम-मेरा सलाम। पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, यही हैं जिनके चार धाम, ऐसे अजेय सैनिकों को, मे...
'सुलघने दे मुझे खुद मै ही, ना दे हवा तू ध्यान दे, मै आग हूं तू जान ले, अभी भड़का नहीं हूं तू मान ले।... 'सुलघने दे मुझे खुद मै ही, ना दे हवा तू ध्यान दे, मै आग हूं तू जान ले, अभी भड़का...
तिरंगे की लाज रखते-रखते प्राण अपने न्योछावर करके भारत के लाल कहलाते हो ! तिरंगे की लाज रखते-रखते प्राण अपने न्योछावर करके भारत के लाल कहलाते हो !
बाँट दिया खुद को दो मुल्कों में, और आज तक खड़े हैं हाथ मिलाने को। बाँट दिया खुद को दो मुल्कों में, और आज तक खड़े हैं हाथ मिलाने को।
जा जवान जा, देश का झंडा फहरा...! जा जवान जा, देश का झंडा फहरा...!
तू रस्ता रस्ता पर्वत कर मैं पर्वत पर्वत तोड़ूँगी तू इंसां इंसां दुश्मन कर मैं जन जन अपना खोजूँग... तू रस्ता रस्ता पर्वत कर मैं पर्वत पर्वत तोड़ूँगी तू इंसां इंसां दुश्मन कर म...
आज मैंने पर्वतों की चोटी पर अलग ही शोर देखा है आज मैंने पर्वतों की चोटी पर अलग ही शोर देखा है
फौलादी इरादे लिए, सियाचिन की बदन गला देने वाली, ठण्ड में भी डटे रहते हैं। फौलादी इरादे लिए, सियाचिन की बदन गला देने वाली, ठण्ड में भी डटे रहते हैं।
विस्मय की घड़ी हो,या खुशी का मंजर निश्छल बन, बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना । विस्मय की घड़ी हो,या खुशी का मंजर निश्छल बन, बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना ।
यह कविता देश की सुरक्षा करते जवानों पर आधारित है। यह कविता देश की सुरक्षा करते जवानों पर आधारित है।
माँ तेरी बेटी हूँ, मैं अाकिंचन क्या दे सकती हूँ तुझे, मालूम नहीं......... माँ तेरी बेटी हूँ, मैं अाकिंचन क्या दे सकती हूँ तुझे, मालूम नहीं.........
कँपकँपाती ठंड में भी, हम तुझको हिम्मत की गर्म चादर, ओढ़ना सिखलायेंगे। ऐ जिन्दगी हम तुझको लड़ना ब... कँपकँपाती ठंड में भी, हम तुझको हिम्मत की गर्म चादर, ओढ़ना सिखलायेंगे। ऐ जिन्...
इस देश पर सैनिक का उधार है ।। इस देश पर सैनिक का उधार है ।।