Bhoop Singh Bharti
Horror Action
लड़ी लड़ाई खूब थी, जब लग तन म्हं जान।
देस धर्म की आन पै, जान करी कुर्बान।
जान करी कुर्बान, देस की शान बढ़ाई।
बणा खालसा पंथ, नई या राह दिखाई।
कहते गुरु गोबिंद, इसी पर चलना भाई।
देस धर्म की आन, बचाणे लड़ी लड़ाई।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
कोई किसी को क्या दे दिलासा, कैसे पोंछे आंसू हाथ बंधे हुए, हर कोई बेबस, लाचार, उदास कोई किसी को क्या दे दिलासा, कैसे पोंछे आंसू हाथ बंधे हुए, हर कोई बेबस, लाचार...
ऐ किस्मत मेरे साथ, तेरा क्या गिला था वो आखरी बार मुझे बिस्तर पर मिला था।। ऐ किस्मत मेरे साथ, तेरा क्या गिला था वो आखरी बार मुझे बिस्तर पर मिला था।।
आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है। आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है।
तक सुन पाओगे मिट जाएगा जब तेरी सृष्टि से तेरा ही विधि विधान।। तक सुन पाओगे मिट जाएगा जब तेरी सृष्टि से तेरा ही विधि विधान।।
भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर हावी थी भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर ह...
यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए
आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था। आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था।
गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की। गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की।
जल रहा था टूट जाने के बाद उसको इस बात की समझ आई। जल रहा था टूट जाने के बाद उसको इस बात की समझ आई।
बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था। बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था।
पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा। पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा।
मगर ऐ दोस्त ! दो राहे पर खड़ी जिंदगी में तू कर फिर से शुरूआत नई। मगर ऐ दोस्त ! दो राहे पर खड़ी जिंदगी में तू कर फिर से शुरूआत नई।
आती उसके समक्ष सफ़ेद रौशनी मेरी रूह से... आती उसके समक्ष सफ़ेद रौशनी मेरी रूह से...
सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार। सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार।
पर इस घटना ने दोनों के दिमाग पर गहरा असर किया है। पर इस घटना ने दोनों के दिमाग पर गहरा असर किया है।
अब वो दिन दूर नहीं जब, देह मेरा लावारिस शव कहलाएगा ।। अब वो दिन दूर नहीं जब, देह मेरा लावारिस शव कहलाएगा ।।
वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में नहाना दो वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में...
यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी अम्मी जैसा ख़्वाब ... यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है क...
वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से
जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं। जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं।