Bhoop Singh Bharti
Action Classics Inspirational
सेवा सेहत दोस्ती, लक्ष्य सदा ही तीन।
रैड क्रॉस हरदम रहे, सेवा में ही लीन।
सेवा में ही लीन, बहे करुणा की धारा।
घायल की हो मदद, एक ही रहता नारा।
करो ’भारती’ कर्म, अवश्य मिलेगी मेवा।
भाईचारा प्यार, बढ़ाती हरदम सेवा।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
गुस्से में आ कर करना ना कोई बात। गुस्से में आ कर करना ना कोई बात।
लोकतंत्र या गणतंत्र लोकतंत्र या गणतंत्र
कभी कभी खुद को भी ख़ुश रख लिया करो.. कभी कभी खुद को भी ख़ुश रख लिया करो..
अपने पतियों की जुराबें मरम्मत करती रहें, अपने पतियों की जुराबें मरम्मत करती रहें,
यारों हिल ही गया संसार सारा, जब लगता जय भीम का नारा। यारों हिल ही गया संसार सारा, जब लगता जय भीम का नारा।
हर कोई फ़िदा है उसकी इस सादगी पर। हर कोई फ़िदा है उसकी इस सादगी पर।
भले ही दोनों का अपना अपना वजूद है और है आपस में टकराव भले ही दोनों का अपना अपना वजूद है और है आपस में टकराव
मुझे उसका सबसे पसंदीदा इत्र कर देना मेरे खुदा। मुझे उसका सबसे पसंदीदा इत्र कर देना मेरे खुदा।
जीवन को आगे बढ़ाने के लिए दूसरों से भी माफी मांगने में संकोच ना करें। जीवन को आगे बढ़ाने के लिए दूसरों से भी माफी मांगने में संकोच ना करें।
खुशी को मिले एक अरसा हो गया है। खुशी को मिले एक अरसा हो गया है।
उगाओ और बढ़ाओं, है नहीं इतना मुश्किल, कोशिश तो करो, जुड़ जाएंगी महफ़िल। उगाओ और बढ़ाओं, है नहीं इतना मुश्किल, कोशिश तो करो, जुड़ जाएंगी महफ़िल।
हमराही न बनने की टीस कैसे मिटा पाओगे। हमराही न बनने की टीस कैसे मिटा पाओगे।
खुद से भी ज्यादा परवाह करते हैं वे केवल रिश्तों की। खुद से भी ज्यादा परवाह करते हैं वे केवल रिश्तों की।
निरंतर सजग सार्थक प्रयास आपके बदल देंगे इस जीवन के परिणाम को। निरंतर सजग सार्थक प्रयास आपके बदल देंगे इस जीवन के परिणाम को।
कर्मठ हमेशा कर्म को करता, सदा जीवन-मरण को एक समझता है।। कर्मठ हमेशा कर्म को करता, सदा जीवन-मरण को एक समझता है।।
हर एक दिल दीवाना है “नारायण” का दुनियां में एक तू ही सहारा है चंदा सा मुखड़ा तेरा हर एक दिल दीवाना है “नारायण” का दुनियां में एक तू ही सहारा है चंदा सा म...
अपनी कविता और कहानी में समाज को संदेश देते हैं।। अपनी कविता और कहानी में समाज को संदेश देते हैं।।
पल भर की जिंदगी, फिर करता अभिमान। सोच कभी रे पगले, कितना बड़ा अज्ञान।। पल भर की जिंदगी, फिर करता अभिमान। सोच कभी रे पगले, कितना बड़ा अज्ञान।।
आता है हर साल, यही प्रकोप है आतप। आता है हर साल, यही प्रकोप है आतप।
एक शिक्षित आत्मनिर्भर नारी समाज का सुधार करती जाए। एक शिक्षित आत्मनिर्भर नारी समाज का सुधार करती जाए।