Bhoop Singh Bharti
Action Classics Inspirational
सेवा सेहत दोस्ती, लक्ष्य सदा ही तीन।
रैड क्रॉस हरदम रहे, सेवा में ही लीन।
सेवा में ही लीन, बहे करुणा की धारा।
घायल की हो मदद, एक ही रहता नारा।
करो ’भारती’ कर्म, अवश्य मिलेगी मेवा।
भाईचारा प्यार, बढ़ाती हरदम सेवा।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
इरादे तो इरादे है, इरादों का क्या हारते हिम्मत का शर्मसार कश्ती का मज़ाक इरादे तो इरादे है, इरादों का क्या हारते हिम्मत का शर्मसार कश्ती का मज़ाक
झूठे मुंगेरीलाली सपने दिखाना कम से कम हमें जीने तो दो। झूठे मुंगेरीलाली सपने दिखाना कम से कम हमें जीने तो दो।
चरित्र पर कभी दाग न आए बढ़ाओ देश व परिवार का मान। चरित्र पर कभी दाग न आए बढ़ाओ देश व परिवार का मान।
सब संस्कार का पाठ करें पर अहंकार से बात करें सब संस्कार का पाठ करें पर अहंकार से बात करें
तब संसार में चारों ओर, खुशियां ही खुशियां छायी थी। तब संसार में चारों ओर, खुशियां ही खुशियां छायी थी।
खेल ख़त्म होते ही वो मुझे सबसे पहले दफनाता है ! खेल ख़त्म होते ही वो मुझे सबसे पहले दफनाता है !
दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे ! दिख रहे समय की आहट में बरबादी के आसार मुझे !
किताबें उपहार में जिंदगी बनकर मिलती हैं। किताबें उपहार में जिंदगी बनकर मिलती हैं।
जरा तू सोच ऐ नादान तू मुझे बचा लेता, बोतल में पानी के बदले दरिया से नहा लेता, जरा तू सोच ऐ नादान तू मुझे बचा लेता, बोतल में पानी के बदले दरिया से नहा लेता,
कहती ये सरकार, लाभ का बिल अन्नदाता। कहती ये सरकार, लाभ का बिल अन्नदाता।
उठो चलो अब आगे बढ़ो संघर्ष ही है जीवन का निखार।।..... उठो चलो अब आगे बढ़ो संघर्ष ही है जीवन का निखार।।.....
सूखी हुई नहरों में, तपते हवा के पहरों से, प्यासी प्यासी सी झीलों में, बसते हुए शहरों स सूखी हुई नहरों में, तपते हवा के पहरों से, प्यासी प्यासी सी झीलों में, बसते हु...
समझना हमको है साथी पथ का, हवाएं तो जहां तहां रुक जाएगीं। समझना हमको है साथी पथ का, हवाएं तो जहां तहां रुक जाएगीं।
तू नफरतें उड़ेलता, वो सिर्फ और सिर्फ प्यार है तू नफरतें उड़ेलता, वो सिर्फ और सिर्फ प्यार है
यह साजन का सजनी से वादा हैं हाँ, ये वादा हैं, मेरा ये वादा हैं। यह साजन का सजनी से वादा हैं हाँ, ये वादा हैं, मेरा ये वादा हैं।
फिर हम आस लगा बैठेंंगे भोर ! जरा जल्दी आ जाना ! फिर हम आस लगा बैठेंंगे भोर ! जरा जल्दी आ जाना !
गरीब की मजबूरी समझें बीमार की दूरी भी समझें गरीब की मजबूरी समझें बीमार की दूरी भी समझें
विजय की अलाप से जयघोष नाद फुकिये विजय की अलाप से जयघोष नाद फुकिये
स्वर्ण हार बन के जो सजा हुआ है धाम इस द्वार मृत्यु के खड़ा है, मृत्यु पाश को लिए स्वर्ण हार बन के जो सजा हुआ है धाम इस द्वार मृत्यु के खड़ा है, मृत्यु पाश को ...
जिनके मन में नहीं डर है कानून का उस गुनहगार को फिर सज़ा कौन दे। जिनके मन में नहीं डर है कानून का उस गुनहगार को फिर सज़ा कौन दे।