कुंडलिया : "मेरे दाता भीम"
कुंडलिया : "मेरे दाता भीम"
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अभिनंदन मन से करूं, मन में भरकर प्रीत।
मेरे दाता भीम हैं, मिली इन्हीं से जीत।।
मिली इन्हीं से जीत, जिंदगी इनसे मेरी।
भीमराव की देन, रात सब मिटी अँधेरी।।
कहे ’भारती’ आज, नाज से करता वंदन।
करता हूं करजोड़, भीम का मैं अभिनंदन।।
