STORYMIRROR

Antariksha Saha

Tragedy

4  

Antariksha Saha

Tragedy

बेगाना शहर

बेगाना शहर

1 min
280

तुमको कोई शौख नहीं है सुनने का

फिर भी हम हर बात बताते फिरते हैं

पता नहीं बेगानों मे क्यों अपना ढूंढ़ते फिरते हैं

दोस मेरा नहीं तेरे इस शहर का है

लोग अपने दिखते है लेकिन

हर वोह बात की गोसिप करते फिरते हैं।

अच्छा तो अपना गाओं ही था

लोग कम चालक है लेकिन

साथ देते फिरते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy