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कर विश्वास

कर विश्वास

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द्रुत गति के वेग से चपला चले चहूं ओर है,

आँधी अंधड़ और बवंडर की कहाँ कोई छोर है। 

जीत हार ये लय है, इसको मान, ना कुछ और है ,

तू धरा का मान है, ये जानना कुछ और है। 

रुक ना तू अपने मुकाम से ,

कूप रज्जु पकड़ जरा ।

नीर छान के तू निकाले ,

इस धरा से तू जरा ।

द्रुत गति के वेग से चपला चले चहूं ओर है ,

आँधी अंधड़ और बवंडर की कहाँ कोई छोर है। 


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More hindi poem from Dr Abhishek Kumar Srivastava(अपने रीति-रिवाजों, परंपराओं में विश्वास, पूर्वजों के मान-सम्मान के दृष्टीकोण से कार्यों का संपादन,जयप्रकाश नारायण जी एवं गुरुदेव टैगोर जी को मार्गदर्शक मानना। )

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