STORYMIRROR

"मुक्कमल "

"मुक्कमल "

1 min
272

हर चीज मुक्कमल है तेरे आरजू के इन्तहा पर, 

तेरा धैर्य और संयम बयान करेंगे तेरे हालात को। 

तू रोक न तेरे अंदाज बयानबाजी को, 

मुक्कमल जहां की हसरत नसीब होगी तुझे वहीं से। 

मुश्किल हालात तोड़ेंगे तुझे कतरा-कतरा, 

तू नौसिखिया नहीं जो बिखर जाए झुककर इनसे। 

टूटता तारा नहीं जो फिर से जुड़ न पाए तू, 

सारा आकाश तेरे उड़ान को भी व्याकुल है। 

परवरिश तेरी भी टूटते पत्थरों सी, 

क्या पता इबारत का जंहा टिक जाए उसी पर। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Dr Abhishek Kumar Srivastava(अपने रीति-रिवाजों, परंपराओं में विश्वास, पूर्वजों के मान-सम्मान के दृष्टीकोण से कार्यों का संपादन,जयप्रकाश नारायण जी एवं गुरुदेव टैगोर जी को मार्गदर्शक मानना। )

Similar hindi poem from Inspirational