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आसरा

आसरा

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कभी जो उदास हो जिंदगी को सोचता हूं, 

टूटते तारे सी अजीब सी रोशनी होती है। 

आसमान, सूरज ,चांद, सितारें सब हैं यहाँ, 

टूटते तारे की अपनी ही सिसकियाँ होती हैं। 


जिंदगी में सब दिखते अपने से हैं, 

यकीन मानिये कौन कहाँ किसी का होता है। 

ये पिछले बर्षों के याद संजो रखें जो हमने, 

सफर उन्हीं के सहारे चल रहा है शायद। 


जद्दोजहद और मौसमी परिंदों से रोज का मिलना है, 

आसरे न जाने किस आश से चला जाता हूं। 

कभी जो उदास हो जिंदगी को सोचता हूं, 

टूटते तारे सी अजीब सी रोशनी होती है। 


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More hindi poem from Dr Abhishek Kumar Srivastava(अपने रीति-रिवाजों, परंपराओं में विश्वास, पूर्वजों के मान-सम्मान के दृष्टीकोण से कार्यों का संपादन,जयप्रकाश नारायण जी एवं गुरुदेव टैगोर जी को मार्गदर्शक मानना। )

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