।।कोरोंना काल।।
।।कोरोंना काल।।
दहसत में हुई है दुनिया, कोरोणा के काल में।
समा रही है सारी दुनिया,आज मृत्यु के गाल में।
आया है कैसा वायरस, दुनिया समझ न पाई।
भयभीत है क्यो दुनिया,बचाव इससे न ढूॅ॑ढ़ पाई।
बंद हो घरों में सब लोग, बैठे रहे बहुत दिन।
गुजारा कब तक होता, बिन काम के बहुत दिन।
खत्म हो गया था राशन, बहुत से घरों का।
मर रहे थे भूख से, बुरा हाल था सब घरों का।
उपाय खूब किए थे, बचने का इससे लेकिन।
कुछ लोग थे बदकिस्मत,जान बच न पाई लेकिन।
अस्पतालों में थी मारामारी, बिस्तर नहीं था खाली।
सब दूर भागते थें, मिलती न थी एक चाय की प्याली।
रात दिन लगे थे चिकित्सक, मरीजों के इलाज में।
मरीज कम न हो रहे थे, दुनिया में किसी भी हाल में।
बचाव में ही बचाव है, है बीमारी बहुत गंभीर।
घबराने से न काम चलेगा, मन में रखो बस धीर।
