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Abasaheb Mhaske

Tragedy


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Abasaheb Mhaske

Tragedy


कोई नहीं किसी का

कोई नहीं किसी का

1 min 219 1 min 219

हर कोई अपने जुगाड़ में

राजा हो या रंक

खो गई इंसानियत

जीने की भगदड़ में


कहने को तो सब कहते हैं

यह क्या हो रहा हैं

जो कुछ भी हो रहा हैं

सही नहीं हो रहा हैं


जो कुछ भी हो रहा है

उसके हम सब जिम्मेदार हैं

हम क्या बोये उन्हीं पर मदार हैं

जो बोयेंगे वही तो पायेंगे


जाने कहाँ गए वो लोग

मिल जुलकर रहते थे

सुख दुःख आपस में बांटते थे

हँसते -खिलते महकते थे


माहौल इतना बिगाड़ा किसने

क्यों डर लगने लगा हैं सच्चाई से ?

और भागने लगे सब अच्छाई से

कल के साथी आज दुश्मन बन बैठे हैं


बापू के वो तीन बन्दर कहा गए ?

चारों तरफ अँधेरा ही अँधेरा छा गया

मतलबी बनी हैं दुनिया सारी

क्यों लग रह हैं कोई नहीं किसी का ?



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