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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Classics Fantasy

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Classics Fantasy

कमबख्त इश्क

कमबख्त इश्क

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मिठास इश्क की, कर देती पागल,

लाख दवा दो,पर हुस्न होता हल।

दिन-रात,सुबह शाम, देता दर्द है,

अच्छा हो अब,पहले ही संभल।।


चख लेते इक बार, तो खो जाते,

अजब दास्तां हैं,रोते कभी हँसाते।

हँसना अच्छा है, पर रोना है बुरा,

रोना ही हो तो, क्यों दिल लगाते।।


कमबख्त इश्क की पतंग उड़ाये,

हँसते गाते इस जहां से पार जाये।

हर एक शाम प्यार के गीत गाये,

हसीन जीवन का ये लुत्फ उठाये।।


चलो इश्क की एक पतंग उड़ाये,

उन्मुक्त गगन तले यूं हम हँसाये।

सारे दुख दर्द को अब दूर भगाये,

खुद सुने, दूसरों को यह सुनाये।


कमबख्त जनों को खूब रुलाये ,

प्यार की हवा में उड़ते ही जाये,

निज भावों को बस उन्हें सुनाये,

दिल को दिल के पास लगाये।।


साहित्याला गुण द्या
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