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कितना बदल गया है जमाना

कितना बदल गया है जमाना

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पहले था सयुंक्त परिवार का जमाना,

हर शाम होती थी ज्ञान की बातें,

आज बिखर गया है परिवार,

और कम हो गयी है मुलाकातें,

हर घर में मिलता था मान-सम्मान,

और बड़ों का होता था स्वागत-सत्कार,


अब खो गए वो संस्कार और प्यार,

और हर घर में बढ़ गया द्वेष और अत्याचार।

हर गांव घर में था भाईचारे का माहौल,

और आपस में बोले जाते थे मीठे बोल,


आज हर कदम पर हो रहा है इज्जतों का खेल,

और न रहा कोई रिश्ता अनमोल,

सभी घर परिवार में थी एकता,

और चिट्ठियों का था प्रचलन,

आधुनिकता कि इस दौड़ में,

कितना व्यस्त हो गया अब जीवन|

बहु-बेटियों की होती थी इज्जत,

और हर कदम पर थी मान मर्यादा,


बढ़ी गरीबी-बेरोजगारी और असमानता,

साथ ही अधूरा रहा गया हर किया गया वादा,

पहले मिलकर होता था हर जश्न मनाना,

और आसान था रोटी कमाना,

आज मुश्किल हो गया है परिवार चलना,

कितना बदल गया है जमाना।






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