किसान
किसान
कृषक सदा सम्पूज्य रहा है, बढा रहा देश की शान ।
किसान की मेहनत से मिलता सबको यहाँ धान।
बंज़र ज़मीन पर परिश्रम के छींटे की बौछार कर,
किसान वसुंधरा को करता हरा भरा है वो बलवान।
अन्न उगाता भरपूर किसान अनेक नये नये उत्पाद,
कृषक के कठिन परिश्रम से देश हमारा बनता महान्।
इतनी मेहनत करता है पर क्या मिलता है उसको,
दलालों की मंडी में ढगा जाता है मेहनतकश इंसान।
सरकारी योजनाओं का भी उसे नही मिलता है लाभ,
दफ्तरों के मुलाजिम के व्यवहार से दुखी होता किसान।
भोले भाले किसान करते है प्रगति की बात कोई मानता नहीं,
हालातो के आगे हो मजबूर किसान खोने लगता सम्मान।
सड़कों पर जाम लगते राष्ट्र संगठन द्रोह मचाते चहुंओर,
अन्नदाता रहता गरीब का गरीब बिचौलियों डालते अवधान ।।
