STORYMIRROR

Swati K

Romance Classics

4  

Swati K

Romance Classics

ख्याल...

ख्याल...

1 min
300

गुजरते हर लम्हों में 

तुम्हारा ही ख्याल है

हर ख्यालों में 

तुम्हारा ही हाल-ए-जिक्र है

इश्क की तिश्नगी तो देखो...


जैसे चांदनी बिखरकर यूं

ओस की बूंदों में सिमट रहा

तुम्हारे प्यार की तपिश यूं

मेरे जर्रे जर्रे से लिपट रहा


पर कहीं कुछ टूटा सा

कहीं कुछ अधूरा सा

आंसू भी हमसे कुछ रूठा सा

आंखों में जाने कहां खोया सा


हर सितारा आसमां

में आज खफा सा

अंधेरी रातों से गुफ्तगू करता 

दिल आज कुछ परेशां सा


जैसे नदियां सागर से यूं

मिलन को मचल रहा

तुम्हारे दीदार को

ये आंखें तरस रहा

ना चाहत कुछ और बाकी रहा...


मेरी जिंदगी को जिंदगी मिल जाए

जो तुमसे एक बार रूबरू हो जाए

"ख्यालों" को मेरे मंजिल मिल जाए

 बस तू आकर मेरे रूह में समा जाए !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance