चाहत
चाहत
न चाहते हुए भी आप क्यूँ हमें याद आते हो
इन आँखों से होकर
आप क्यूँ दिल में समाते हो
जितना भुलाना चाहते हैं
आप उतना ही क्यूँ याद आते हो
जितना हम दूर जाते हैं
आप उतना ही क्यूँ करीब आते हो
बड़ा ही नाज़ुक रिश्ता है
आप इसे क्यों बढ़ाना चाहते हो
दिल का दर्द लेकर
आप क्यूँ चैन गँवाना चाहते हो
हम अकेले ही ठीक है
आप क्यूँ हमसफ़र बनाना चाहते हो
न चाहते हुए भी
आप क्यूँ दोस्ती बदन चाहते हो
न चाहते हुए भी
आप क्यूँ हमें याद आते हो

