STORYMIRROR

अनजान रसिक

Romance

4  

अनजान रसिक

Romance

भाषा आंखों की

भाषा आंखों की

1 min
409

आखों में मेरी छुपे है कुछ बोल कभी तो उनको सुन के देखो ना ,

अधरों से बात निकले बिन भी ह्रदय पटल को पढ़ लो ना .

मेरी खामोशी कई राज़ों का पर्दाफाश करती है ,

परदे के पीछे की प्रत्यक्ष दुनिया बहुत कुछ बयां करती है .

उन अनकही बातों को कभी तो समझ कर देखो ना ,

हम नादान आशिक़ तेरे , आखों से ही मेरे प्रेम को समझ लो ना.

आज लबों से कुछ ना बोलूंगी,शांत मन से बस तुमको निहारूंगी ,

जो तुमने समझा मूक मुझे,ना जाने कितने हिस्सों में बिखर जाऊंगी .

अश्कों में ह्रदय ये पिघलेगा,पर चुप्पी का आलम ना टूटेगा ,

प्रेम मन में दफ़न है जो, उसका राज़ नहीं खुल पायेगा .

कोई रंजिश ना होगी तुमसे ,ना कोई गिला फिर होगा,

दास्ताँ ए इश्क़ अधूरा रह जाएगा , दिल टूटेगा पर शोर ना होगा.

आखों में ख़्वाबों की नमी ज़िंदा ना रह पाएगी ,

जो राज़ समेटे हुए हैं , वो संभाल कर स्वयं ये बंद हो जाएंगी .

फिर दोबारा आखों से आखों की गुफ्तगू ना कभी हो पाएंगी,

मायूसी का आलम कुछ यूं छाएगा कि फिर कभी यें ना खुल पाएँगी,बस खो जायेंगी,

खो जायेंगी.....


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance