STORYMIRROR

Swati K

Romance

4  

Swati K

Romance

इक अनुभूति.......

इक अनुभूति.......

1 min
24

प्रेम फुहारों से बंजर हृदय का भीगना 
गोधूलि की मद्धिम लाली में हृदय का सुर्ख हो जाना
बंसी के मधुर सुरों सा हृदय का गुनगुनाना 
ओस की बूंदो का अंतस को छू जाना

मानो सूखी दूबों में हरियाली आना
मानो गरजती बरसती अठखेलियाँ करती 
बौछारों का स्पर्श और धरा का मुस्कुराना 
मानो स्थिर हृदय का फिर स्पन्दित होना
बिन श्रृंगार स्त्री का अलौकिक सौंदर्य निखरना......

सत्य है या स्वप्न या अंतस के भावों को 
शब्दों में पिरोती कवि की कल्पना......
हां अकल्पनीय......
यथार्थ को चित्रित करता गहन प्रेम

प्रेम में होना......संयोग या नियती 
हर्षित ,अभिभूत हृदय की सुंदर अनुभूति
प्रेम के रंगों में डूबी स्त्री अपलक निहारे प्रिये को 
विस्मय सी स्वयं से पूछे.......

पुष्प अर्पण करुं प्रियतम या सृजनहार को
सांवरे की कृति तुम......
प्रेम से पुष्पित पल्लवित हृदय का राग तुम 
भोर का श्रृंगार ,सांझ ढले दिये की जोत तुम
रोम रोम में रचे मेरे सर्वस्व मेरे प्रेम तुम......स्वाती 







 

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance