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Rabindra kumar Sahoo

Abstract Romance


4.7  

Rabindra kumar Sahoo

Abstract Romance


प्यार

प्यार

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कौन है हमारे मोहब्बत

कौन है हमारे यार

क्या है ये मोहब्बत

क्या है प्यार ?

ये ज़िन्दगी

ये परिवार

सबका आरंभ और

प्रारंभ है मोहब्बत और प्यार।


ये दुनियां, ये संसार,

ये समाज, ये राष्ट्र

सबका आरंभ है ये प्यार।

ये सृष्टि, ये स्थिति और प्रलय

सबका साथ था ये और

रहेगा भी ये प्यार।

ये जग, ये लोग,

हर अनुष्ठान और संस्थाएं

सबका मूल है प्यार।


दुनिया की सबसे

 महत्वपूर्ण चिज,

सबसे मूल्यवान बस्तु है प्यार।

 हर सम्बन्ध का मूल है

हर इन्सान की पहचान है

 ये मोहब्बत और प्यार।


बन्धुता, प्रेम, बिबाह आदि

 सबका मूल है ये प्यार 

 हर घर, परिवार, 

ये संसार का स्थिति का

सम्भब है

देब, मानब, दानब

सबका बिकाश की

धारा है ये प्यार।


प्रेमीयो की प्रेम की मूलमंत्र

हर इन्सान की इन्सानियत की

बीजमन्त्र है ये प्यार।

 जब नहीं मन और हृदय में प्यार

सारे दुनियां, सारे संसार का

हो जायेगा अन्धकार

 प्यार ही विश्वास

प्यार ही विकास

प्यार ही सब कुछ है मेरा यार

सबसे बड़ा, सबसे सुन्दर है 

 जग में ये प्यार

प्यार ही दुनियां

प्यार ही संसार

प्यार ही शान्ति,

 प्यार ही सुख, 


प्यार ही शिक्षा,

प्यार ही समृद्धि,

प्यार ही बृद्धि,

प्यार ही बुद्धि


प्यार ही सिद्धि

सबसे अनमोल

सबसे बड़ा

दुनियां में है प्यार

मत भुलो मेरे यारों

सबसे बड़ा 

जग में है ये प्यार।


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