STORYMIRROR

manasvi poyamkar

Romance

4.8  

manasvi poyamkar

Romance

ख्वाईश

ख्वाईश

1 min
2.6K


आँखों की मेरी ख्वाईश जानोगे क्या

चेहरा तेरा इनमे समाया है

उलफत से की है ईबादत खुदा की

दुवाओ मे खुद से पहले तुझे पाया है

मेरी उलझें जिस्म को लिपटे हुआ

अनसुलझा तेरा साया है....

आँखों की ख्वाईश मे तेरा साया है......


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance