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manasvi poyamkar

Fantasy

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manasvi poyamkar

Fantasy

जीत या हार

जीत या हार

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मेरी जीतने की तलब कुछ ऐसी थी

के जब माँ के आँचल में


कोई इनाम नजर ना आया

तो मैंने उसका भी साथ छोड़ दिया।


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