manasvi poyamkar
Fantasy
मेरी जीतने की तलब कुछ ऐसी थी
के जब माँ के आँचल में
कोई इनाम नजर ना आया
तो मैंने उसका भी साथ छोड़ दिया।
पूरी हसरत
आशिक आवारा
बेवफाई.
जीत या हार
खुदाई इश्क़ की
सहारा
मेरा दिल
विरान सा दिल....
मतलब
पायल की छनक
कभी कोई शिकायत मत करना दोस्तों। आखिर एहसास भी तो होते हैं धीरे धीरे कभी कोई शिकायत मत करना दोस्तों। आखिर एहसास भी तो होते हैं धीरे धीरे
खड़ी थी बहुत बड़ी उड़न तश्तरी वहाँ, चौंक गई देख उसे मैं। खड़ी थी बहुत बड़ी उड़न तश्तरी वहाँ, चौंक गई देख उसे मैं।
जो अपनी बंदिशों में बंधे साथ बहते तो है मगर मिल नहीं सकते जो अपनी बंदिशों में बंधे साथ बहते तो है मगर मिल नहीं सकते
मैं उसके संग मिलके सब देखना चाहता हूँ बस एक बार रोना चाहता हूँ। मैं उसके संग मिलके सब देखना चाहता हूँ बस एक बार रोना चाहता हूँ।
एक बार चूम लूं तेरे सर को मैं, एहसास दूं तुझे मेरे होने का। एक बार चूम लूं तेरे सर को मैं, एहसास दूं तुझे मेरे होने का।
तोरे बापू कुछ ना कहते, तेरे आहट को तकते रहते माँ भी तेरी चल ना सकती, पर तुलसी की फेरे तोरे बापू कुछ ना कहते, तेरे आहट को तकते रहते माँ भी तेरी चल ना सकती, पर तुलसी...
नदी के दो पाटों सा जो नदी के साथ साथ चलते हैं पर मिलते कभी नहीं.......! नदी के दो पाटों सा जो नदी के साथ साथ चलते हैं पर मिलते कभी नहीं.........
जब मछली सी जनता इनके जाल में खुद आकर फंस जाती है जब मछली सी जनता इनके जाल में खुद आकर फंस जाती है
ये क्या कर रहे हैं, प्रभु ये तो मुनीम का है काम । ये क्या कर रहे हैं, प्रभु ये तो मुनीम का है काम ।
तुम में ही कहीं, वो सही है पर तुम भेड़ों के झुंड में घुसे जा रहे हो। तुम में ही कहीं, वो सही है पर तुम भेड़ों के झुंड में घुसे जा रहे हो।
अपने प्रेम से बनायें वे दोनों एक नई दुनिया अपने प्रेम से बनायें वे दोनों एक नई दुनिया
बर्फीली चोटियाँ ये हिमालय की मेरे मन को मोहित सदा करतीं बर्फीली चोटियाँ ये हिमालय की मेरे मन को मोहित सदा करतीं
यहाँ हर साँस में एक चीख़ दबी रहती है ऐसे में फिर कैसे तू यहाँ से यूँ गुज़रती है। यहाँ हर साँस में एक चीख़ दबी रहती है ऐसे में फिर कैसे तू यहाँ से यूँ गुज़रती है...
कभी लोग, कभी पति, कभी भाई , कभी बेटे तो कभी बहु के गणित में उलझ के रह गई ! कभी लोग, कभी पति, कभी भाई , कभी बेटे तो कभी बहु के गणित में उलझ के रह गई !
जहाँ अनेकता में एकता की नींव मजबूत बनी हो ऐसा भारत हो जहां ना कोई बुराई हो जहाँ अनेकता में एकता की नींव मजबूत बनी हो ऐसा भारत हो जहां ना कोई बुराई हो
संगमरमर तराश कर बनाई हुई कोई मूरत जैसी, मन खुश दे रही थी शीतलता भरी दुपहरी।। संगमरमर तराश कर बनाई हुई कोई मूरत जैसी, मन खुश दे रही थी शीतलता भरी दुपहरी।।
दिल फिर से बच्चा बन जाएगा, मौसम की पहली बारिश में। दिल फिर से बच्चा बन जाएगा, मौसम की पहली बारिश में।
जहाँ के कण-कण में प्यार झलकता हो आओ फिर गाँव चले जहाँ शांति सुकून मिले जहाँ के कण-कण में प्यार झलकता हो आओ फिर गाँव चले जहाँ शांति सुकून मिले
छोड़ कागज क़लम और दुनियाँ को देख जाने कब तू भी तारीख बन जायेगा छोड़ कागज क़लम और दुनियाँ को देख जाने कब तू भी तारीख बन जायेगा
यमराज मेरी बात सुनकर अपना सिर खुजाने लगा, यमराज मेरी बात सुनकर अपना सिर खुजाने लगा,