manasvi poyamkar
Fantasy
प्यार तो तुम भी बहुत करते थे हमसे
बस फरक इतना था
मेरे लिये प्यार का मतलब तुम थे
और तुम्हारे लिये मै बस मतलब का प्यार।
पूरी हसरत
आशिक आवारा
बेवफाई.
जीत या हार
खुदाई इश्क़ की
सहारा
मेरा दिल
विरान सा दिल....
मतलब
पायल की छनक
तुम कही भी रहो, हमेशा खुश रहो यही दुआ माँगा है। तुम कही भी रहो, हमेशा खुश रहो यही दुआ माँगा है।
ढुलकते अश्कों का दर्द जिसने जान लिया । ढुलकते अश्कों का दर्द जिसने जान लिया ।
ऐसा प्यार किताबों में होता है असल जिंदगी में नहीं। ऐसा प्यार किताबों में होता है असल जिंदगी में नहीं।
सच तो यह हैं कि तू द्रोपदी से भी बड़ी हैं तू द्रोपदी से भी बड़ी है। सच तो यह हैं कि तू द्रोपदी से भी बड़ी हैं तू द्रोपदी से भी बड़ी है।
कण-कण में झलकती है अप्रतिम सुंदरता। कण-कण में झलकती है अप्रतिम सुंदरता।
एक.. मन भर बिखरने को, और एक.. जी भर..संभलने को एक.. मन भर बिखरने को, और एक.. जी भर..संभलने को
चिड़ियों की चहचहाहट से प्यारे, जीवनमय बगिया खिलखिलाती मिलेगी।। चिड़ियों की चहचहाहट से प्यारे, जीवनमय बगिया खिलखिलाती मिलेगी।।
ज़ुल्फ़ें बाँध आए है वो आज वस्ल को अंजान है पल भर में ये खुल जाएगी ज़ुल्फ़ें बाँध आए है वो आज वस्ल को अंजान है पल भर में ये खुल जाएगी
बड़े विचार बड़ी सोच बड़ी उम्मीदों, के संग चल रहा हूं हर पल बड़े विचार बड़ी सोच बड़ी उम्मीदों, के संग चल रहा हूं हर पल
गाय हमारी संस्कृति में माता समान है क्या हम अपनी संस्कृति की रक्षा भी न करे अब ? गाय हमारी संस्कृति में माता समान है क्या हम अपनी संस्कृति की रक्षा भी न करे अब ?
मेरा मन न जाने कितने काश और कशमकश में उलझ जाता है.. मेरा मन न जाने कितने काश और कशमकश में उलझ जाता है..
किसी प्रणय निवेदन की आश रंगने लगती है मुझे अपने ही वर्ण में। किसी प्रणय निवेदन की आश रंगने लगती है मुझे अपने ही वर्ण में।
जिसमें ना होगी कोई भी रीत होगी हर तरफ मेरी ही जीत। जिसमें ना होगी कोई भी रीत होगी हर तरफ मेरी ही जीत।
जीवन में हो कितना भी गम हर गम का इलाज कर देती। जीवन में हो कितना भी गम हर गम का इलाज कर देती।
मानवता धर्म बड़ा सबसे है, तर्क उन्हें समझाने को। मानवता धर्म बड़ा सबसे है, तर्क उन्हें समझाने को।
जब-जब आह्लादित होता मन, गीत प्रणय के गाती हूँ। जब-जब आह्लादित होता मन, गीत प्रणय के गाती हूँ।
अब तिश्नगी सी ज़िंदगी और खालीपन, रूठा समाज टूट कर मुझसे जाने किधर गया। अब तिश्नगी सी ज़िंदगी और खालीपन, रूठा समाज टूट कर मुझसे जाने किधर गया।
ना खबर कोई ना दस्तक दिए मर्ज तो थी उनके दीदार की । ना खबर कोई ना दस्तक दिए मर्ज तो थी उनके दीदार की ।
गुफ्तगू करनी है तुमसे कभी थोड़ा पास बुलाकर। गुफ्तगू करनी है तुमसे कभी थोड़ा पास बुलाकर।
मेरे कफन पर टपकते आसुओं में थोड़ी तो सच्चाई होगी थोड़ी तो सच्चाई होगी। मेरे कफन पर टपकते आसुओं में थोड़ी तो सच्चाई होगी थोड़ी तो सच्चाई होगी।