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Palak Inde

Romance Fantasy Inspirational

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Palak Inde

Romance Fantasy Inspirational

ख्वाब

ख्वाब

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कुछ दूर ही था वो

मगर पास भी नहीं था

जानती थी, उसके करीब हूँ मैं

मगर, वो एहसास भी नहीं था

थी चाहत , उसका हाथ थामने की

माफ करना , वो चाहत आज भी ज़िंदा है

कैसे समझाऊँ मैं इसे

ये मन, एक उड़ता परिंदा है


एक ख्वाब रोज़ लेकर सोती हूँ

कि कभी उससे मुलाकात हो जाये

सारी उम्र भी कम है

फिर भी, एक बार बात हो जाये

रोज़ , उस मुकाम की तमन्ना करती हूँ

कि उसकर काबिल बन जाऊँ कभी तो

सिर्फ मैं ही न चाहूँ उसे

मैं उसकी आरज़ू बन जाऊँ कभी तो


मैं नहीं आ सकती , ये जानकर

काश, वो खुद मेरे करीब आ पाता

कितनी मोहब्बत है उसके ख्याल भर से

काश, वो ये बात जान पाता।


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