STORYMIRROR

shilpa kumawat

Romance

3  

shilpa kumawat

Romance

प्रेम की नैया

प्रेम की नैया

1 min
243

तू है गगन विस्तार तो मैं एक तारा क्षुद्र हूँ।

तू है महासागर अगम, मैं एक धारा क्षुुद्र हूँ।।

तू महानद तुल्य तो मैं एक बूंद समान हूँ।

तू है मनोहर गीत तो मैं उसकी एक तान हूँ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance